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पृथ्वीराज ने अपने समय के विदेशी आक्रमणकारी मुहम्मद गौरी को कई बार पराजित किया। युवा पृथ्वीराज ने आरम्भ से ही साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाई। पहले अपने सगे-सम्बन्धियों के विरोध को समाप्त कर उसने राजस्थान के कई छोटे राज्यों को अपने क़ब्ज़े में कर लिया। फिर उसने बुंदेलखण्ड पर चढ़ाई की तथा महोबा के निकट एक युद्ध में चदेलों को पराजित किया। इसी युद्ध में प्रसिद्ध भाइयों, आल्हा और ऊदल ने महोबा को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। पृथ्वीराज ने उन्हें पराजित करने के बावजूद उनके राज्य को नहीं हड़पा। इसके बाद उसने गुजरात पर आक्रमण किया, पर गुजरात के शासक ‘भीम द्वितीय’ ने, जो पहले मुइज्जुद्दीन मुहम्मद को पराजित कर चुका था, पृथ्वीराज को मात दी। इस पराजय से बाध्य होकर पृथ्वीराज को पंजाब तथा गंगा घाटी की ओर मुड़ना पड़ा।

इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरू
हाल ही में खबर आई कि बेंगलुरू एयरपोर्ट पर पायलटों को वहां रन-वे पर भूत दिखाई देता है। कई पायलटों ने बताया कि रनवे पर उन्हें सफेद साड़ी और खुले बालों में एक औरत दिखाई दी। पायलट साहब को लगा कि कोई औरत है, जो रास्ता भटक गई है। क्रू में से एक को भेजा देखने के लिए पर वो तब तक गुम हो चुकी थी।

कुलधरा
जैसलमेर से 17 किमी दूर एक गांव है कुलधरा। यह गांव पूरा तहस-नहस हो चुका है। करीब 200 साल पहले यहां पर 15,000 लोग रहते थे। लेकिन एक दिन सब लोग वहां से चले गए। ऐसा कहा गया कि जो यहां रात को रुकेगा, वो मर जाएगा। गांव को श्राप लगा है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर
राजस्थान के दौसा जिले एक मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर है। इस मंदिर में ओझा, झाड़-फूंक जैसी चीजें हमेशा होती रहती हैं। ऐसा माना जाता है कि भूत-चुड़ैल के लपेटे में आए लोगों का ये तब तक झाड़-फूंक किया जाता है, जब तक भूत भाग न जाए। शाम की आरती में पूरा मंदिर चीखों से गूंजता है। मंदिर के परिसर में लोगों का खाना-पीना, किसी चीज को छूना, बात करना मना है.

नाहरगढ़ का किला

ये जयपुर के पास में ही है. साल 1734 में राजा सवाई जय सिंह II ने बनवाया था. दिल बहलाने और अपनी रानियों के साथ टाइम स्पेंड करने के लिए. इसमें बहुत सारी रानियों का बेडरूम था. राजा के टाइम से ही इस किले में कोई लोचा है. जब भी कंस्ट्रक्शन का काम लगता, कोई न कोई प्रॉब्लम मुंह उठाए चली आती. कई लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं. कहते हैं किले में एक महंत की आत्मा है. जिसका मंदिर राजा सवाई ने छीन लिया था.

राणा कुंभा महल

ये महल चित्तौड़गढ़ में है. यहां पर रात के वक्त औरतों की चीखें सुनाई देती हैं. वो सब मदद मांगती हैं. 14वीं सेंचुरी में दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन खिलजी तशरीफ रखे हुए थे. कहते हैं मेवाड़ की महारानी पद्मिनी उसे पसंद थीं. उसी के चक्कर में खिलजी ने मेवाड़ पर हमला किया था. पर उसके हाथ आया ठेंगा. रानी करीब 700 औरतों के साथ आग में कूद गईं. किले में एक तहखाना था. वहां भी कई लोगों ने अपनी जान दी थी.

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