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हुक्का पीना आज एक ‘ट्रेंड’ बन चुका है. इसमें इस्तेमाल होना वाले तम्बाकू को शहद या गुड का फ्लेवर दिया जाता है, जिससे हुक्के का स्वाद मीठा हो जाता है. मान जाता है कि यही एक कारण है हुक्के के लोकप्रिय होने का!

आमतौर पर तमाम लोग मानते हैं कि हुक्का स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं होता, जबकि सच तो यह है कि हुक्के का एक कश सिगरेट पीने से भी ज्यादा घातक होता है.

जानलेवा ‘हुक्के का सेशन’

हुक्का पीना सिगरेट पीने की तरह ही स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है, कई बार तो सिगरेट से भी खतरनाक!

अक्सर एक हुक्का सेशन 30-80 मिनट तक चलता है, जोकि 100 सिगरेट पीने के बराबर होता है. हुक्का और सिगरेट दोनों के सेवन से अंत में कार्सिनोजन निकलता है. यह फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारी जैसी गंभीर डिजीज का कारण बन सकता है.

वहीं, यह भी अवधारणा है कि सिगरेट की तरह हुक्का पीने की लत नहीं लगती. जबकि, हुक्के में भी सिगरेट की तरह निकोटीन मौजूद होता है, जो लोगों को अपना लती बना लेता है.

‘हुक्का शेयरिंग’ नहीं है सुरक्षित

यह शेयरिंग प्रक्रिया संक्रमित बीमारी जैसे-ट्यूबरक्लोसिस(टीबी), हेपेटाइटिस और हर्पीज़ वाइरस आदि को दावत देता है.वहीं दूसरी ओर हुक्के के भीतर लगातार कोयला जलने से उससे निकलने वाले कॉर्बन मोनोऑक्साइड व मेटल शरीर के लिए हानिकारक माने जाते हैं.

यही नहीं, जो लोग हुक्के का सेवन कर रहे लोगों के आसपास बैठे होते हैं, उनके लिए भी यह मुसीबत का सबब बन सकता है.

हुक्के के लिए ‘हैंगआउट पॉइंट’

ऐसा माना जाता है कि हुक्के की शुरुआत सदियों पहले भारत में ही हुई. उसके बाद हुक्का दुनियाभर में घूमते-घूमते इतना मशहूर हो गया कि इसका सेवन करना कई जगहों पर प्रतिष्ठा का प्रतीक समझा जाने लगा. ख़ासकर मध्य पूर्व के देश जैसे मिस्र, ईरान, इराक़, तुर्की आदि में इसका सेवन तेजी से बढ़ता देखा गया.

हुक्के का सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक होने के मिथक के चलते इसका चलन अमेरिका, यूरोप और रूस में भी फैल गया.

भारत की बात की जाये तो आज भी बड़े-बूढ़े गांव में हुक्का पीते दिखाई देते हैं, पर धीरे-धीरे शहरों में भी इसका चलन बढ़ने लगा है. आलम यह है कि इसके लिए आजकल हुक्का सेंटर तक बनने लगे हैं.

‘फ्रूट फ्लेवर’ की असल सच्चाई

क्या पता जिस ‘फ्रूट फ्लेवर’ के वह दीवाने होते हैं, उसके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है!

असल में फ्लेवर्ड हुक्के में सिर्फ स्वाद के लिए फ्रूट का कृत्रिम रस मिलाया जाता है. उसका असली फ्रूट्स से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं होता. चूंकि, यह रस ढ़ेर सारे रसायनों से बना होता है, इसलिए इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ना लगभग तय ही होता है.

‘योगा’ दिला सकता है छुटकारा

हां, आप इस उलझन में हैं कि कैसे, तो आइये इसकी राह खोजते हैं!

योगा इसमें आपकी बड़ी मदद कर सकता है. इसे आपके अंदर भटकाव की स्थिति कम हो सकती है, जो हुक्के की लत छुड़ाने में मददगार हो सकती है. योगा के साथ-साथ आप अपने खानपान में भी बदलाव करके हुक्के की लत से खुद को दूर रख सकते हैं.

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