Sharing is caring!

मोबाइल हमारे जीवन का एक अंग है.जिसके बिना जिंदगी नहीं चल सकती सोशल मीडिया और व्हाट्सअप जैसी चीजों का बढ़ता चलन मोबाइल के उपयोग को और भी बड़ा देता हैं. ऐसे में सबसे बड़ी समस्यां तब आ जाती हैं जब मोबाइल की बैटरी ख़त्म होने लगती हैं. अब आप घर पर या ऑफिस में हो तो एक बार फिर भी इलेक्ट्रिक पॉइंट ढूंढ मोबाइल चार्ज कर सकते हैं लेकिन यदि आप घर से दूर काफी लम्बे समय के लिए हैं और कहीं आसपास मोबाइल चार्जिंग की सुविधा भी नहीं हैं तो बहुत मुश्किल हो जाती हैं.ऐसी परिस्थिति में एक आम व्यक्ति हाथ पे हाथ धर हार मान लेता है. या फिर कोई रईसजादा अपने साथ एक्स्ट्रा मोबाइल रख के ले जाता हैं.

दरअसल हाल ही में 40 हजार किसानो ने नासिक से लेकर मुंबई तक एक रैली निकाली थी. ये रैली अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए एक शांत प्रदर्शन था. इसके अंतर्गत किसान लोन का भार कम करने, अधिक बिजली के बील में कुछ राहत और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे थे.इस रैली के लिए उन्होंने नासिक से लेकर मुंबई तक का 180 किलोमीटर का सफ़र पैदल ही तय किया. जहाँ एक तरफ सभी की नज़रें इस किसान की रैली और उनकी मांगो पर थी तो वहीँ हमने इस बीच एक बहुत ही दिलचस्प बात नोटिस की. दरअसल इस रैली में एक किसान ने कुछ अजीब सा गेजेट पहन रखा था. उसे देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसने अपने सिर पर वायरों से जुड़ी एक टेबलेट रखी हैं.

हालाँकि जब हमने नजदीक से जाकर उस किसान से इस बारे में पूछा तो पता चला कि वो इस गेजेट की सहायता से अपना मोबाइल चार्ज कर रहा था. दरअसल उसने अपने सिर पर एक सोलर पैनल रखी हुई थी. ये सोलन पैनल सूरज से निकलने वाली किरणों को सोख लेती हैं और फिर इस उर्जा से मोबाइल की बैटरी चार्ज कर देती हैं. ये काफी आश्चर्य की बात थी कि हम पढ़े लिखे लोगो से ज्यादा ये कम पढ़े किसान सोलर उर्जा के बारे में अधिक जानते हैं

Sharing is caring!