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भारत में कई सारे मंदिर हैं जो अपनी चमत्कारी शक्तियों की वजह से जाने जाते हैं. लेकिन हम आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं जिसे इंग्लिश देवी का मंदिर कहा जाता है. जी हां, इस मंदिर की देवी इंडियन नहीं बल्कि फॉरेनर है, साथ ही अगर आपने देवी के दर पे मत्था टेकतें हैं तो आप किसी फॉर्रेनर की तरह फ्लूएंट इंग्लिश बोलते हुए नजर आएंगे.

ऐसा है इंग्लिश देवी का मंदिर

हम बात कर रहे हैं.. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बनका गांव स्थित इंग्लिश देवी मंदिर की । इस मंदिर में स्थापित इंग्लिश देवी की मूर्ति में किसी विदेशी मेम की छवि दिखती है, जिनके एक हाथ में एक बड़ी सी कलम और दूसरे हाथ में एक किताब है। देवी के सिर पर हैट लगी है जो कि शायद इस बात का प्रतीक है कि आज का दौर अंग्रेजी का ही है। वास्तव में इंग्लिश देवी की मूर्ति लिबर्टी ऑफ स्‍टेच्‍यू से प्रेरित हैं.. साथ ही इस मूर्ति पर बना धम्म चक्र बौद्ध धर्म का प्रतीक है। ये मूर्ति लगभग 20 किलो वजनी है और पीतल की बनी हुई है

सीखनी होगी इंग्लिश

लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है. ये मूर्ति 20 किलो वजनी है और और पीतल की बनी हुई है. अंग्रेजी देवी मंदिर की स्थापना का मूल उद्देश्य दलित समाज को यह संदेश देना है कि उनका उद्धार इस भाषा के ज्ञान से ही हो सकता है. इस मंदिर के निर्माण की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, यहां के दलितों का मानना है कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने हमेशा से ही अंग्रेजी शिक्षा और उसके प्रचार प्रसार पर बल दिया था और कहा था कि यदि दलितों को उन्नति करनी है और आगे बढ़ना है तो उन्हें इंग्लिश सीखनी ही होगी.

स्‍थानीय लोगों की मान्‍यता

यहां के स्थानीय लोगों का ये भी मानना है कि शिक्षा के हिसाब से आज दलित पुरुषों के पास काफी विकल्प है. परन्तु महिलाओं की हालत खराब है और शिक्षा के क्षेत्र में वो ज्यादा ही पिछड़ी हैं, तो यदि इलाके में मंदिर होगा और ये महिलाऐं जब वहां मत्था टेकने जाएंगी तो इंग्लिश देवी उनमें शिक्षा खास तौर से इंग्लिश भाषा का संचार करेंगी और वो इंग्लिश सीख जाएंगी, लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है.

मन्‍नते मांगने भी आते है लोग

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