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इस्लाम में अगर हम समलैंगिकता के खिलाफ़ सबसे क्रूर सज़ा देने वाले देशों की बात करें तो आपको ये जानकार ताज्जुब होगा कि इस मामले में “ईरान” सबसे आगे है. ईरान जो कि शिया बाहुल्य देश है और शिया आमतौर पर “इस्लाम” का उदार चेहरा समझे जाते हैं… मगर गे और लेस्बियन पर अत्याचारों में ये सबसे आगे हैं..

एक अनुमान के अनुसार अस्सी के दशक से अब तक ईरान ने लगभग चार हज़ार (4000) से अधिक समलैंगिकों को मौत के घाट उतारा है. जिस तरह की नफरत ईरान में कानून में समलैंगिकों के लिए देखने को मिलती है उतनी और शायद ही कहीं मिले…

और सबसे अधिक ध्यान देने वाली बात ये है इसमें कि जो शिया आलिम सुन्नियों की हदीसों की हंसी उड़ाते हैं और उन्हें ख़ारिज करते हैं वो उन्ही सुन्नियों की हदीसों पर चलकर समलैंगिकों के खून के प्यासे बने हुए हैं और सुन्नियों से भी दस गुना नफरत की इन्तेहा की हद से भी आगे जा कर वो इस मामले में अपना जौहर दिखाते हैं.

अगर दो लड़के या दो लड़कियां साथ में नंगे सोते पाए गए तो उनको 99 कोड़े मारे जाते हैं.. दो लड़के अगर एक दूसरे को किस करते हैं तो उनके साठ कोड़े मारे जाने का प्रावधान है.. और इन कोड़ों से अक्सर अंदरूनी हिस्सों में रक्त स्राव हो जाता है जिससे अक्सर मौत भी हो जाती है.

ईरान के सुप्रीम अयातुल्लाह खोमैनी के साथी अयातुल्लाह मुसावी-अर्देबली ने तेहरान विश्वविद्यालय में, समलैंगिकों को किस तरह की सज़ा दी जाए उसके बारे में छात्रों को अपने संबोधन में ये निर्देश दिया कि–

“पहले उन्हें (समलैंगिकों को) बंदी बना लीजिये.. फिर उन्हें सीधा खड़ा रखिये.. और फिर उनके शरीर के दो हिस्से कर दीजिये.. उसके लिए या तो आप उनका सर शरीर से अलग कर दें या फिर उनके शरीर को सर से लेकर पाँव तक दो हिस्से में काट दीजिये.. जब वो (समलैंगिक) मर जाएँ, फिर लकड़ी इकठ्ठा कर के उनका शरीर उस पर रख कर आग लगा दो.. या फिर उनको ऊँचे पहाड़ पर ले जा कर नीचे धक्का दे दो.. फिर उनके शरीर को इकठ्ठा कर के उसे आग लगा दो.. या एक गड्ढा खोद कर उसमें आग जला दो और फिर उसमे उसको (समलैंगिक को) ज़िंदा धकेल दो और उसे ज़िंदा जला दो.

वो भी एक शिया देश के सर्वोच्च धर्मगुरु के द्वारा!

समलैंगिकों से इतनी नफ़रत जिसे शिया ढो रहे हैं, वो सुन्नियों और शियाओं की हदीसों में एक समान है… आईये सुन्नियों की एक हदीस देखते हैं समलैंगिकों के बारे में–

हदीसें अल-तिरमिज़ी, 1456; अबू दाउद, 4462; इब्न-माजह, 2561 के अनुसार, इब्ने अब्बास कहते हैं कि पैगम्बर ने कहा था कि “तुम लोग अगर किसी को पाओ जो वो काम कर रहा हो जो पैगम्बर लूत के लोगों ने किया था, तो उसको जान से मार डालो और उसको भी मार डालो जिसके साथ ये काम हो रहा था.”

और बहुत सी हदीसें हैं मगर यही एक काफ़ी है बताने के लिए कि इन नफरतों की जड़ कहाँ से उपज रही है. हदीसें वो सुनी सुनाई बातें हैं जिनके बारे में कोई लिखित प्रमाण नहीं है.. हदीसें एक तरह से वो अनुमान हैं जो प्रचलन में हैं कि इन बातों को पैगम्बर ने कहा था.. मगर इन्हीं सुनी सुनाई बातों पर आज इस्लाम का सारा शरीया कानून टिका है.

ये तो बातें हो गयीं इस्लामिक कानून की.. मगर अब हमे ज़मीनी हक़ीक़त देखनी होगी कि इतने सख्त कानून, इतनी नफरत और इतनी सजाए मौत के बाद इस्लामिक देशों में समलैंगिक “विचारों” वाले लोगों की क्या स्थिति है..

क्या इन सजाओं से डर कर लोगों के मस्तिष्क और शरीर ने समलैंगिक होना छोड़ दिया है क्या?

वो बातें जो पहले ढकीं और छिपी हुई थीं वो इन्टरनेट के आने के बाद से सारी दुनिया को पता हो गयी हैं. इस्लामिक देशों में पहले जो लोग चोरी छुपे समलैंगिक सम्बन्ध बनाते थे उनके बारे में लोग जान कर भी अनजान बने रहते था, मगर अब इन्टरनेट के द्वारा हमें ये पता चल जाता है किस तादाद में इस्लाम के मानने वालों के दिमाग में समलैंगिकता या गे सम्बन्ध पनप रहा है!

आप कितना भी कोने में, रज़ाई में, बीहड़ में, रेगिस्तान में बैठ कर अपने मोबाइल को छिपा कर पोर्न देखें या पोर्न सर्च करें, सारी दुनिया को पता चल जाता है कि कितने लोग आप जैसे, आपके देश, शहर और कसबे से समलैंगिक पोर्न सर्च कर रहे हैं. गूगल को तो आपकी लोकेशन से लेकर सब कुछ पता रहता है.

जब गूगल ने अपने सर्च आंकड़े सार्वजनिक करने शुरू किये तो इस्लामिक देशों में हडकंप मच गया… और उनकी सरकारों ने जल्दी जल्दी ऐसे सर्च और वेबसाइट पर प्रतिबन्ध लगाना शुरू कर दिया.

सऊदी समेत इरान ने लाखों पोर्न वेबसाइट बैन कर रखी हैं… मगर प्रतिबन्ध लगाने का मतलब ये नहीं है कि लोगों के मन और मस्तिष्क से “समलैंगिक सेक्स” गायब हो गया. ये इस्लाम का कानून “शरीया” बनाने वालों की बड़ी पुरानी, कारगर और भावुक समझ है. वो शुरू से ये सोचते आये हैं कि जिस चीज़ के लिए लोगों को मना करना हो उस चीज़ पर प्रतिबन्ध लगा दो. लोग औरतों को देखते हैं तो औरतों को ढँक दो.. मर्द औरतों से दोस्ती करना चाहते हैं तो औरतों को घर में क़ैद कर दो.. मिलने जुलने न दो.. ये अरबी लोगों का आदिम तरीक़ा है हर समस्या से निपटने का!

एक मशहूर कहानी है, एक बहुत बड़े मनोवैज्ञानिक की– “जब वो एक बार अपनी पत्नी के साथ पार्क में बैठे थे और उन्होंने जब अपने छोटे बेटे को आसपास नहीं पाया तो दोनों पति पत्नी परेशान हो कर उसे ढूँढने लगे. पार्क बहुत बड़ा था. ढूंढ कर जब वो थक गए तो उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा कि क्या तुमने उसे पार्क में कहीं जाने से मना किया था? तो पत्नी ने कहा कि हाँ.. मैंने उसे बोला था कि फव्वारे के पास मत जाना डूब जाओगे.. मनोवैज्ञानिक पति ने कहा कि चलो, वो वहीं होगा.. और जब वो दोनों फव्वारे के पास गए तो देखा कि उनका बेटा वहीं फ़व्वारे के पास बैठा था.”

ये मनोविज्ञान है… इंसान का मस्तिष्क कैसे काम करता है इसके पीछे सैकड़ों सालों से शोध चल रही है और उन शोधों के नतीजे चौकाने वाले हैं. जहाँ जो कुछ भी वर्जित है उसका आकर्षण वहां सबसे अधिक है. ये इसी तरह काम करता है… आप कितना भी शरीया में पीएचडी कर लें मगर मानव मस्तिष्क और शरीर आपकी शरीया पीएचडी नहीं पढ़ेगा और न उस हिसाब से चलेगा.

अगर आप एक मर्द हैं और आपको दूसरे मर्द से लगाव होता है तो आप के पास दो ही रास्ते हैं, या तो आप इसे स्वीकार कर लें या फिर अपनी जीन (Gene) बदलवा लें… क्यूंकि ये जीन का मामला है.. और जीन को इस से कोई मतलब नहीं कि आप किस धर्म में पैदा हुए हैं.. वो अपने हिसाब से काम करेगा.

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