Sharing is caring!

शायद आपको यह खबर थोड़ी अजीब जरूर लगे, लेकिन सौ फीसदी सच है। भारत में एक ऐसा गांव हैं जहां के लोग बिना वीजा के म्‍यांमार में जा सकते हैं। बता दें कि नागालैंड के लोंगवा गांव में ऐसा ही होता है, जहां पर कोन्याक जनजाति के लोग रहते हैं। दरअसल, इस गांव का आधा हिस्सा भारत में तो आधा हिस्सा म्यांमार में है। यहां के राजा के घर के बीच से गुजरता है बॉर्डर।

 यहां के राजा के घर के बीच से गुजरता है बॉर्डर…
– नागालैंड की राजधानी कोहिमा से 389 किमी दूर नॉर्थ ईस्ट की तरफ मोन जिले में लोंगवा गांव बसा है।
– इंडिया के ईस्टर्न इंटरनेशल बॉर्डर पर बसा छोटा सा गांव अपने आप में अनोखा है।
– यहां बसने वाली कोन्याक जनजाति के राजा का नाम अंग नगोवांग हैं, जिनके अधीन लोंगवा समेत कुल 75 गांव आते हैं। इनमें से कुछ गांव म्यांमार, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में हैं।
– वहीं, इनके घर के बीच से होकर म्यांमार और भारत का बॉर्डर गुजरता है। ऐसे में इनका परिवार खाना तो म्यांमार के हिस्से में खाता है, लेकिन सोने के लिए भारतीय सीमा का उपयोग करता है।
– लोंगवा गांव के राजा की फैमिली भी काफी बड़ी है, जिसमें उनकी 60 बीवियां भी शामिल हैं। वहीं, राजा का बेटा म्यांमार आर्मी में है।

भारत और म्यांमार सीमा पर है लोंगवा गांवNagaland-6336

इस कबीले को दो हिस्सों में कैसे बांटा जाए, इस सवाल का जवाब नहीं सूझने पर अधिकारियों ने तय किया कि सीमा रेखा गांव के बीचों-बीच से जाएगी, लेकिन कोंयाक पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। बॉर्डर के पिलर पर एक तरफ बर्मीज़ में और दूसरी तरफ हिंदी में संदेश लिखा गया है।

जमीन के लिए सिर काट देते थे76036919

कोंयाक आदिवासी सबसे खूंखार आदिवासियों में से एक माने जाते हैं। 1940 से पहले अपने कबीले और उसकी जमीन पर कब्जे के लिए वे अन्य लोगों के सिर काट देते थे। कोयांक आदिवासियों को हेड हंटर्स भी कहा जाता है। इन आदिवासियों के ज्यादातर गांव पहाड़ी की चोटी पर होते थे, ताकि वे दुश्मनों पर नजर रख सकें।

1940 में लगी हेड हंटिंग पर रोक461352955

हत्या या दुश्मन का सिर धड़ से अलग करने को यादगार घटना माना जाता था और इस कामयाबी का जश्न चेहरे पर टैटू बनाकर मनाया जाता था। 1940 में हेड हंटिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया। हालांकि, इसके बाद भी यह घटना जारी रही। माना जाता है कि 1969 के बाद हेड हंटिंग की घटना इन आदिवासियों के गांव में नहीं हुई।

Sharing is caring!