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PNB Scam, देश का सबसे बडा बैंकिंग फ्रॉड माना जा रहा है। इस धोखधडी से पर्दा तब पंजाब नेशनल बैंक ने अपने मुंबई ब्रांच में हुए 1771.17 करोड़ डॉलर (करीब 11000 करोड़ रुपए) के फर्जी लेन देन की जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया पंजाब नेशनल बैंक के शेयर के भाव गिये और साथ ही आरोप प्रतयारोप का सिलसिला भी शुरू हो गया।

सबसे बडा सवाल यह है कि आखिर कैसे आरबीआई और बैंक के आला अधिकारियों को धोखे मे रख 11 हजार करोड कि इस धोखधडी को अंजाम दिया गया। माना जा रहा है कि इस धोखे की शुरुआत 2011 मे हो गई थी जब पहली बार 800 करोड की लेटर ऑर अंडरटेकिंग नीरव मोदी को दि गई थी।

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क्या है लेटर ऑर अंडरटेकिंग?

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग शॉर्ट टर्म लोन मुहैया करने के लिये कोई भी अंतरराष्ट्रीय बैंक या किसी भारतीय बैंक की अंतरराष्ट्रीय शाखा की ओर से जारी किया जाता है। इस अंडरटेकिंग को आसान शब्दो मे ऐसे समझे कि अंडरटेकिंग देने वाली बैंक यह कह रही है की डिफाल्ट के स्तिथि मे अंडरटेकिंग मे दी गई राशि का भुगतान बैंक स्वंय करेगी। इस अंडरटेकिंग के आधार पर कोई भी कंपनी दुनिया के किसी भी हिस्से में राशि को निकाल सकती है।

कैसे हुआ घोटाला?

ज्वैलरी डिजायनर नीरव मोदी ने अपनी फर्म के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक से 2011 मे 800 करोड का लेटर ऑफ अंडरटेकिंग हासिल किया। यह अंडरटेकिंग बिना जरूरी मार्जिन मनी  के दिया गया और बैंक के सेंट्रलाइज्ड चैनल को इसकी कोई खबर भी न थी।

कैसे खुला घोटाले का पोल?

लेटर ऑफ क्रेडिट जब कंपनी भुगतान नहीं कर पाती तो उसे भुगतान के लिये जारी करने वाले बैंक के पास भेजा जाता है। पंजाब नेशनल बैंक के पास जब करीब 11000 करोड़ रुपए के भुगतान के लिये अंडरटेकिंग आई तब पता चला की जुनियर अधिकारियों और नीरव मोदी ने गलत तरीके से अंडरटेकिंग हासिल किया था।

क्या ये घोटाला रोका जा सकता था?

हाँ! जब पहली बार 800 करोड रुपयो का लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का दुरुपयोग कि बात सामने आई थी तब यह मामला सामने आ सकता था। पर पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों कि मीली भगत के कारण 2017 तक लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का दुरुपयोग कर धोखाधडी जारी रही। अंडरटेकिंग के जारी होने पे इसकी जानकारी स्विफ्ट कोड मैसेजिंग से सभी बैंको मे भेजी गई, इसके बाद नीरव मोदी ने इस अंडरटेकिंग के ज़रिए अलग अलग बैंको से पैसे निकाले। नीरव मोदी  ने इस तरह करीब 11000 करोड़ रुपए निकाले है।

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