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द्वितीय विश्व युद्ध मे यहुदी (Jews) के साथ हुए अत्याचार की कहानी आज पूरा विश्व जानता है। पर एक कहानी ऐसी भी है जो बहुत कम लोग जानते है, खास कर हम भारतीय। ये कहानी एक ऐसे भारतीय राजा की है जिसने ब्रिटिश राज के खिलाफ जा कर ना केवल Jews महिलाओ और बच्चो को शरण दिया बल्कि उन्के लिये अपने राज्य और दिल दोनो के दरवाजे खोले।

द्वितीय विश्व युद्ध मे हिटलर ने यहुदी (Jews) के साथ अमानविय अत्याचार किये। हिटलर को आज भी दुनिया ने इस अपराध के लिये माफ नही किया है। कई किताबो और डोक्युमेंट्री के जरिए जब हिटलर और नाज़ी पार्टी की क्रुर्ता का सबुत दुनिया के सामने आय तो लोगो कि रुह काँप गई।

Holocaust Facts

हमे ये बताया गया कि हिटलर और नाज़ी पार्टी ने कैसे पुरे यहुदी (Jews) समाज को जड से खतम करने कि कोशिश कि, उन्के साथ जानवरो से बदतर सलुक किया पर, क्या हमे ये बताया जाता है कि उसी  हिटलर  ने अमेरिका, ब्रिटेन और कई सारे देशो को ये बोला था कि वे Jews को अपने देश मे पनाह दे दे। पर उस समय कोई देश सामने नही आया। जिसका खामियाज़ा भुगता मासुम Jews लोगो ने।

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1942 मे पोलैंड से एक जहाज मे करीब 1000 महिलाए और बच्चे भाग कर आए, जर्मनी सैनिक Jews को खोज खोज के मार रहे थे। उन बेकसुर लोगो सर छुपाने के लिये जगह कि तालश थी। उस जहाज को ईरान ने अपनी जमीन पर रुकने तक नहीं दिया, कई देशो के मना कर देने के बाद जहाज गुजरात के बंदरगाह के पास आया,। ब्रिटिश हुकुमत जो कि इस युद्ध मे हिट्लर के खिलाफ थी और समय समय पर Jews पर हो रहे अत्याचार के नाम पर मोर्चे चला रही थी उसने भी उन्हे पनाह देने से मना कर दिया।

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यह बात तत्कालिन गुजरात के राजा दिग्विजय सिंह जडेजा जी को नागवार गुजरी। उन्के समझ के परे था कि कैसे कोई मासुम बेगुनाह लोगो पर हो रहे अत्याचार को देख कर अपनी आँखे बंद कर सकता है। उन्होने जहाज को नवानगर के तट पर बुलाया और ये आदेश दिया कि जहाज पर सवार सभी लोगो को उन्के राज्य मे पनाह दी जाए। जहाज बंदरगाह पर आया तब महाराजा खुद उन लोगो को लेने आए। दिग्विजय सिंह जी उन्का स्वागत करते हुए बोला था की वो खुद  अनाथ और बेसहारा ना समझे क्योंकि वो सभी नवानगरी है और नवागर के पिता (महाराजा) के बच्चे है।

 

महाराजा ने ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ जा कर कर ना सिर्फ करीब 1000 Jews महिलाए और बच्चे को पनाह दी पर साथ उन्के लिये सारी सुविधाओ का इंतज़ाम किया। बच्चो के लिये अपनी रियासत के सैनिक स्कूल मे पढाई का इंतज़ाम किया, वो खुद उन बच्चो के के साथ समय गुज़ारते थे। महाराजा ने ने उन सभी को गोद ले लिया था, अपने पैसो और ब्रिटिश हुकुमत से दुशमनी की परवाह ना करते हुए उन्होने इंसानियत कि मिसाल कायम की है।

 

Maharaja Digvijaysinhji Ranjitsinhji Jadeja

 

शर्नाथी के रूप मे आए ये बच्चे करीब नौ साल तक भारत मे रहे। पोलैंड कि राजधानी मे महाराजा के नाम पर सडके और स्कूल बनवाए गए है।

 

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