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जिंदगी के कुछ अहम पढ़ाव होते है जैसे स्कूल में दाखिला, कॉलेज में दाखिला, पहली नौकरी और विवाह. ये कुछ ऐसे पड़ाव हैं जो इंसान की जिंदगी में बेहद ख़ास हैं. इन मौकों के बाद उसकी जिंदगी एक नया मोड़ लेती है. जब इंसान की शादी हो जाती है तो उसके बाद वो एक से दो हो जाता है. इसलिए शादी के मौके को सबसे खूबसूरत बनाने का सपना शादी करने जा रहा इंसान अकेले नहीं देखता बल्कि उसके घर वाले भी सालों से इस मौके के लिए सपने संजोते रहते हैं.

यही वजह है कि लोग डेस्टिनेशन वेडिंग में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं, वेडिंग प्लानर को बुलवाते हैं और एक हटकर थीम वाली शादी करते हैं. आपने आज तक कई तरह की शादियों के बारे में सुना होगा मगर आज हम आपको एक ऐसी शादी के बारे में बताने जा रहे हैं जो सबसे हटकर है क्योंकि ये शादी ट्रेन में हुई है. जिसे संपन्न कराया है आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर जी ने। तो देर किस बात की आइये जानते हैं पूरा मामला।
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कहने को तो दहेज जैसी चीजें अब गुजरे जमाने की बातें हो गई हैं लेकिन आज भी ये हमारे समाज में मौजूद हैं. इससे समाज को मुक्ति दिलाने के लिए श्रीश्री रविशंकर ‘ओम अनुग्रह यात्रा’ कर रहे हैं, जिसमें वो लोगों को दहेज ना लेने का संकल्प दिला रहे हैं. श्रीश्री रविशंकर की अनुग्रह यात्रा के दौरान 28 फरवरी 2018 को गोरखपुर और लखनऊ के रास्ते में सचिन कुमार और युवती ज्योत्स्ना पटेल ने सात फेरे लिए हैं. यह भारत की ऐसी पहली शादी है जो ट्रेन में हुई है. इस लिहाज से सचिन और ज्योत्सना ने इतिहास रच दिया है।
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भदोही के न्यू पीएचसी में बतौर फार्मासिस्ट काम कर रहे सचिन सिंह और उनके साथ सात फेरे लेने वाली ज्योत्सना सिंह पटेल सेंट्रल जीएसटी में बतौर टैक्स असिस्टेंट काम कर रही हैं. दोनों ही कई सालों से रवि शंकर के शिष्य हैं. सचिन और ज्योत्सना की शादी 18 मार्च को अक्षय तृतीया के दिन होने वाली थी मगर उसकी किस्मत में कुछ और ही लिखा हुआ था. सचिन अपने गुरु की मौजूदगी में शादी करना चाहते थे, जिसे उनके गुरु ने ट्रेन में ही संपन्न करा दिया.
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सफर में हमसफर बनने वाले इस कपल की शादी में ट्रेन में सफर कर रहे यात्री बाराती बन गए. श्रीश्री रविशंकर ने उन्हें पिता की तरह आशीर्वाद दिया. फिर ढोल-मजीरा, सितार की धुन और मंत्रोच्चार के साथ धूम-धाम से सभी ने शादी की खुशियां मनाईं. शादी के लिए पूरी ट्रेन को फूलों से किसी मंडप की तरह सजा दिया गया था. तस्वीरें देखकर आप समझ सकते हैं कि ये ट्रेन वाली शादी कितनी शानदार थी.
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सचिन मूल रूप से कौशांबी के सिराथू तहसील के उदिहन खुर्द गांव के रहने वाले हैं लेकिन अब वो इलाहबाद में रहते हैं. उनके पिता नरेंद्र पाल सिंह भरवारी स्थित कॉपरेटिव बैंक की सोसायटी के सचिव हैं. वहीं अगर दुल्हन ज्योत्सना की बात की जाए तो उनका परिवार फतेहपुर का रहने वाला है.

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सचिन और ज्योत्सना के अनुसार उनका विवाह 18 अप्रैल को एक बार फिर से पूरे रीति-रिवाज के साथ होगा. ज्योत्सना ने शादी की खुशी जताते हुए कहा कि “गुरु जी से हमें जो स्नेह और आशीर्वाद मिला, वह हमारे जीवन का दुर्लभ पल है. यह सौभाग्य की बात है कि गुरुजी ने हमारा गठबंधन कराकर आशीर्वाद दिया.”

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2017 में कर्नाटक राज्य पर्यटन विकास निगम (केएसटीडीसी) ने आम जनता के लिए ट्रेन यात्रा के दौरान शादी करने के लिए एक विशेष सेवा शुरू की थी. मगर अभी तक इस विशेष सेवा के तहत किसी ने शादी नहीं की है.

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