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बिछड़े लोगों के दोबारा मिलने की कहानी हमेशा ही दिलचस्प होती है. ऐसी कहानियां कम ही सुनने मिलती हैं कि बिछड़े लोग वापस मिल गए. ऐसे में गुम हुए लोगों की देखभाल करने वाले इंसान आज के ज़माने में कम ही है. भारत में न जाने कितनी तरह की भाषा बोली जाती है और यह भाषा की विविधता कई बार मुश्किल पैदा कर देती है. हम आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी बताने वाले हैं जिन्हें दूसरे की भाषा न समझ पाने के कारण इस हालत में ज़िन्दगी गुजारनी पड़ी.

यह कहानी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे रायबरेली जिले के रालपुर कस्बे की है. दरअसल तमिलनाडु राज्य का रहने वाला एक वृद्ध व्यक्ति एक सफ़र के दौरान अपने परिवार से बिछड़ कर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जा पहुंचा. करीब 6 महीने तक इन्हें अपने घर से दूर रहना पड़ा. यह छः महीने इस वृद्ध व्यक्ति ने भीख मागते हुए गुजारे और जब रोटी के लिए भीख मांगते इस बुजुर्ग शख्स पर लालगंज तहसील के रालपुर के अनंगपुरम स्कूल के स्वामी भास्कर स्वरूप जी महाराज की नजर पड़ी, तो उन्हें आश्रम में ले आए.

स्वामी के सेवकों द्वारा भिखारी को नहलाने-धुलाने के बाद उसके कपड़ों को तलाशी ली गयी, लेकिन तलाशी में मिले कागजात से सब चौक गए. तलाशी में जेब से आधारकार्ड के साथ 1,06,92,731 रूपये की एफडी के कागजात मिले. मदद के लिए पुलिस को बुलाया गया पर यूपी पुलिस ने उसे भिखारी बोल कर अपना समय ख़राब न करने की सलाह दे डाली.

वृद्ध की जेब से मिले आधारकार्ड में लिखे पते पर संपर्क करने पर पता चला कि वह बुजुर्ग तमिलनाडु का करोड़पति व्यापारी है. फिर स्वामी जी द्वारा फ़ोन कर सूचना दी गई. सूचना उसके घर पहुंचते ही उनकी पुत्री अपने पिता को लेने पहुंची. ‘स्वामी सूर्य प्रबोध इंटर कालेज अनंगपुर’ के संस्थापक स्वामी भास्कर स्वरूप जी महाराज ने बताया कि बीते 13 दिसंबर को एक वृद्ध व्यक्ति स्कूल परिसर मे आया और भोजन के लिये भीख मांगता देखा गया.

स्वामी जी मीडिया से मुलाकात में बताया कि उसके पास से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान मुथैया नादर पुत्र सोलोमन पता-240 बी नार्थ थेरू, तिरूनेलवेली तमिलनाडु, 627152 के रूप में हुई और 1,06,92,731 रूपये की एफडी के साथ छह इंच लम्बी तिजोरी की चाबी भी मिली. कागजात में लिखे नंबर में फ़ोन लगाया गया. फ़ोन से सूचना मिलने पर मुथैया नादर की बेटी गीता तमिलनाडु से फ्लाइट द्वारा लखनऊ पहुंची.

फिर लखनऊ से टैक्सी बुक करके रालपुर पहुंची जहां उसने अपने पिता को देख उनसे खुशी में लिपट गयी. स्वामी जी को अपने पिता से मिलाने का आभार जताया और उनके सहयोगियों के प्रति भी आभार जाताया.मुथैया नादर की पुत्री गीता ने बताया कि उसके पिता 5-6 माह पहले रेल यात्रा के दौरान गुम हो गये थे. शायद किसी विकृत बीमारी के कारण पागल व भिखारी की हालत मे इधर उधर घूम रहे थे. गीता ने स्वामीजी के इस परोपकार का आभार प्रकट कर रही थीं. क्षेत्र के लोगों ने भी स्वामी जी की सराहना की.

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