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हर साल लाखों लोग फ़िटनेस को अपना न्यू इयर रिज़ोल्यूशन बनाते हैं लेकिन उनमें से कुछ गिने चुने लोग ही सफ़ल हो पाते हैं, लेकिन ऐसा क्यों होता है? जिम जाने का सारा उत्साह आखिर कुछ महीनों में ही ठंडा क्यो पड़ जाता है.? आइए इसकी पड़ताल करते हैं.

न कोई जवाबदेही, न फ़ेल होने पर निराशा का डर

स्टेनफ़ॉर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी ने साबित किया था कि जिम जाने वाले लोगों के लिए सोशल सपोर्ट के भी बेहद मायने होते हैं. इस स्टडी में हिस्सा लेने वाले 218 लोगों को तीन ग्रुप में बांटा गया. पहले वो लोग जिन्हें स्टैनफ़ोर्ड के इंस्ट्रक्टर का कॉल हर 3 हफ्तों में एक बार आएगा. दूसरे वो लोग, जिन्हें ऐसा ही कॉल एक कंप्यूटर से प्राप्त होगा और तीसरे वो लोग जिन्हें किसी तरह का कोई कॉल नहीं आएगा.

एक साल बाद निष्कर्ष सामने आया कि पहले ग्रुप वाले लोग हर हफ़्ते 178 मिनट्स एक्सरसाइज़ में बिता रहे थे. वहीं दूसरे ग्रुप के लोग 157 मिनट और तीसरे ग्रुप हर सप्ताह केवल 118 मिनट जिम में बिता रहे थे.

इसका मतलब ये हुआ कि अगर कोई जवाबदेही नहीं है और आप अपने जिम रूटीन को लेकर किसी भी शख़्स को अपडेट नहीं करते तो हो सकता है कि आपकी मोटिवेशन खत्म हो जाए और आप जिम जाना बंद कर दे. यही कारण है कि जिम जाना या बॉडी बनाने के लिए शारीरिक औऱ मानसिक दोनों तरीके से मज़बूत होना पड़ता है.

अपने आप से कुछ ज़्यादा ही उम्मीदें पाल लेना

कुछ दिनों में जनवरी आ जाएगा, न्यू इयर के रिज़ोल्य फ़िट होने की मंशा के चलते कुकुरमुत्तों की तरफ़ भीड़ गली मुहल्लों के जिम से लेकर ब्रांडेड जिम में बढ़ जाएगी, इनमें से कुछ ऐसे जोशीले नौजवान भी होंगे जो पहली बार जिम जा रहे होंगे, ऐसे में गलतियां होने की गुंजाइश बढ़ जाती हैं और इन गलतियों के चलते लोग जिम करने की मोटिवेशन खो देते हैं.

आपका लक्ष्य होना चाहिए कि जिम आपके लिए एक ऐसी जगह बन जाए जहां जाए बिना आप असहज महसूस करने लगे. हर हफ़्ते पांच दिन आने की जरूरत नहीं है. अगर जिम शुरू ही किया है तो पहले पहल मशीनों के साथ सहज होने की कोशिश करें. वजन से ज़्यादा अपने पोस्चर पर ध्यान दें. आप जो एक्सरसाइज़ कर रहे हैं.

 यार मज़ा नहीं आ रहा

कुछ लोग किसी जिम मशीन से इतना घबरा जाते हैं कि उसे छूना भी पसंद नहीं करते और इसमें कोई दो राय नहीं कि जिम में कुछ एक्सरसाइज़ वाकई बहुत बोरिंग हो सकती है लेकिन जैसा कि कहा गया है कि आप अपनी किस्मत के खुद मालिक हैं यानि बोर होकर उस एक्सरसाइज़ को बिल्कुल ही खत्म कर देना है या फिर उस एक्सरसाइज जैसी ही कोई दूसरी एक्सरसाइज़ की जा सकती है, ये केवल आप पर ही निर्भर करता है.

यूं तो फ़िट रहने का कोई सीधा-साधा मंत्रा नहीं है लेकिन ये भी सच है कि फ़िट होना अगर इतना आसान ही होता तो दुनिया के ज़्यादातर लोग फ़िट और हॉट होते. अगर आप अपने रूटीन में हेल्दी खाना, भरपूर मात्रा में पानी और अपने फ़िटनेस गोल्स से कमिटेड हैं तो चीज़ें बेहतर हो सकती है.

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